फोन बजते ही होती है घबराहट? आप ‘टेलीफोबिया’ के शिकार हो सकते हैं, जानें लक्षण और बचाव।

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फोन बजते ही घबराहट

कुछ लोगों को फोन की घंटी बजते ही घबराहट होने लगती है। उनकी हार्ट बीट बढ़ जाती है, पसीना आने लगता है। वे फोन नहीं रिसीव कर पाते हैं। अगर किसी के साथ ऐसा हो रहा है तो ये टेलिफोबिया के कारण हो सकता है। 

क्या है टेलीफोबिया (Phone Call Anxiety)?

टेलीफोबिया (telephobia या phone call anxiety) एक मानसिक स्थिति है जिसमें किसी व्यक्ति को फोन कॉल आने या करने से डर, बेचैनी या घबराहट महसूस होती है। यह सिर्फ “फोन न उठाने की आदत” नहीं बल्कि एक प्रकार की सोशल एंग्जायटी की तरह माना जाता है। विशेष रूप से युवा (18–34 वर्ष) इस समस्या से अधिक प्रभावित पाए गए हैं। ब्रिटेन जैसे देशों के सर्वे में 25 लाख से ज्यादा युवा इसी समस्या से जूझ रहे हैं।

 

मुख्य लक्षण (Symptoms)

लोग टेलीफोबिया के दौरान ये संकेत महसूस कर सकते हैं:

  • फोन बजने पर बेचैनी या डर
  • फोन उठाने से पहले असहजता
  • दिल की धड़कन तेज होना
  • बात करते समय घबराहट
  • पसीना या कांपना
  • बातचीत से बचने की प्रवृत्ति
  • सेल्फ-कॉन्फिडेंस में कमी महसूस होना

क्यों होता है?

टेलीफोबिया के कई कारण हो सकते हैं:

  • सोशल एंजायटी (सामाजिक चिंता) — दूसरों की प्रतिक्रिया, गलत समझ या आलोचना का डर
  • चैटिंग की आदतें — लोग लिखित संचार को प्राथमिकता देने लगे हैं, जिससे फोन कॉल की सहजता कम हो गई है
  • स्टैंड-बाय बातचीत का दबाव — फोन पर तुरंत जवाब देने को लेकर असहजता
  • नेगेटिव पास्ट एक्सपीरियंस — पहले फोन पर हुई टेंशन या बुरी खबरों की याद

इससे आत्म-विश्वास (Self-Confidence) कैसे प्रभावित होता है ?

टेलीफोबिया न सिर्फ फोन से जुड़ी चिंता है, बल्कि इसका असर व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन पर भी पड़ता है:

  • इंटरव्यू, नौकरी या रोजमर्रा के रिश्तों में बातचीत से बचना 
  • रिश्तों में दूरी बढ़ना
  • खुद में असहजता और आत्म-विश्वास में कमी महसूस होना

क्या इसका इलाज/समाधान है?

हाँ — टेलीफोबिया पर नियंत्रण पाया जा सकता है:

  • छोटी-छोटी बातचीत से शुरुआत करना
  • फोन कॉल से पहले तैयारी / पॉइंट्स बनाना
  • शांत वातावरण में अभ्यास
  • किसी प्रोफेशनल से सलाह या थेरेपी
  • धीरे-धीरे डर को स्वीकार करना और सामना करना

 

टेलीफोबिया कॉमन है और अकेले आप नहीं हैं — यह तकनीकी आदतों और सामाजिक व्यवहार में बदलाव के कारण बढ़ रहा है, और इससे जुड़ी चिंता को मानसिक स्वास्थ्य के लिहाज़ से गंभीरता से लेना चाहिए। 

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