गोबर उठाने से ‘महाराज’ बनने तक: जयदीप अहलावत की संघर्ष, सफलता और संकल्प की कहानी

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हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में जयदीप अहलावत एक ऐसे अभिनेता हैं, जो शोर नहीं, बल्कि अपनी गहराई और सादगी से दर्शकों के दिल में जगह बनाते हैं। हरियाणा के रोहतक जिले के खरकरा गांव में जन्मे जयदीप एक साधारण जाट परिवार से आते हैं। बचपन में उन्होंने सरकारी स्कूल में पढ़ाई की, खेतों में काम किया और हाथ से गोबर उठाने जैसी जिम्मेदारियां निभाईं। गांव की सादा, बेफिक्र जिंदगी उन्हें आज भी बहुत याद आती है।

उनकी मां फिजिकल एजुकेशन टीचर थीं, जिससे उन्हें खेलों का शौक लगा, जबकि पिता साहित्य प्रेमी थे। छठी कक्षा में पिता ने उन्हें प्रेमचंद की कहानियां दीं, जिससे पढ़ने का चस्का लगा। बहन की किताबें, कविताएं, उपन्यास और नाटक उनके जीवन का हिस्सा बनते गए। ‘सारा आकाश’, ‘अंधा युग’ और ‘सूर्य की अंतिम किरण’ जैसे नाटकों ने अभिनय की ओर उनका रुझान मजबूत किया।

खेल और फौज दोनों से उनका गहरा जुड़ाव रहा। सेना में अफसर बनने का सपना लिए उन्होंने NDA, CDS और SSB की परीक्षाएं दीं, लेकिन हर बार असफल रहे। इलाहाबाद में दो बार SSB इंटरव्यू में स्क्रीनिंग तक में फेल हुए। इसके बाद उन्होंने JBT कोर्स किया और टीचर बनने की कोशिश की, मगर वहां भी मन नहीं लगा। लगातार रिजेक्शन के बाद वे खुद को बेकार और निकम्मा समझने लगे।

थिएटर ने उनका जीवन बदल दिया। मंच पर उन्होंने अपनी कुंठा, गुस्सा और हीनभावना को ऊर्जा में बदला। नींद सुधरी, मन हल्का हुआ और जिंदगी से दोबारा जुड़ाव बना। गुरु सुनील चटकारा ने उन्हें एफटीआईआई जाने की सलाह दी। घरवालों ने भी सहमति दी। एफटीआईआई में शुरुआती छह महीने एडिटिंग, साउंड, डायरेक्शन और कैमरा जैसी जनरल ट्रेनिंग ली, फिर एक्टिंग स्पेशलाइजेशन में गए। अलग-अलग राज्यों के छात्रों के साथ काम करते हुए उन्हें सिनेमा की असली दुनिया समझ आई।

एफटीआईआई के बाद प्रियदर्शन के साथ ‘आक्रोश’ और ‘खट्टा-मीठा’ मिलीं। फिर ‘चटगांव’ और अनुराग कश्यप की ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ में काम किया। इसके बाद ‘विश्व रूपम’, ‘कमांडो’, ‘गब्बर इज बैक’, ‘रईस’ और मेघना गुलजार की ‘राजी’ से उनकी पहचान मजबूत हुई। वेब सीरीज ‘पाताल लोक’ में इंस्पेक्टर हाथीराम चौधरी के किरदार ने उन्हें घर-घर मशहूर कर दिया और उन्हें फिल्मफेयर ओटीटी पुरस्कार मिला।

‘फैमिली मैन’ के दौरान डेविड धवन का फोन आया, जिन्होंने उन्हें अपना जूनियर बताते हुए खुशी जताई। ‘पाताल लोक’ के क्रिएटर सुदीप शर्मा ने उनके लिए भावुक कार्ड लिखा, जिसमें इरफान खान से तुलना का जिक्र था। यह पढ़कर जयदीप रो पड़े। वे कहते हैं, इरफान खान की जगह कोई नहीं ले सकता, लेकिन अगर उनकी कमी में उनका काम किसी को सुकून देता है तो वे खुद को धन्य मानते हैं।

फिल्म ‘महाराज’ में उनके मस्कुलर फिजिक और इंटेंस लुक ने दर्शकों को चौंकाया। उन्हें ‘एन एक्शन हीरो’ के लिए फिल्मफेयर नॉमिनेशन, ‘जाने जान’ के लिए फिल्मफेयर ओटीटी बेस्ट एक्टर (क्रिटिक्स) और ‘महाराज’ के लिए फिल्मफेयर ओटीटी बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर अवॉर्ड मिला। हाल ही में वे धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म ‘इक्कीस’ में नजर आए और अब शाहरुख खान की ‘किंग’ व अजय देवगन की ‘दृश्यम 3’ में दिखाई देंगे। जयदीप कहते हैं, शाहरुख खान उनका ‘इश्क’ हैं और उन्होंने खुद फोन कर उन्हें फिल्म ऑफर की।

जयदीप मानते हैं कि शिद्दत से किया गया काम लोगों तक पहुंचता है। असली सफलता वही है, जो परिवार को खुश रखे, समाज को कुछ दे और आत्मिक संतोष दे। पैसा और नाम जरूरी हैं, लेकिन वे एक सतत प्रक्रिया हैं, कोई एक दिन की मंजिल नहीं।

 

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