बंगाल चुनाव से पहले RSS का मिशन: दलितों के घर प्रवास, बांग्लादेश मुद्दा और घुसपैठ समेत 5 पॉइंट पर फोकस

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6 फरवरी 2025 को सरसंघचालक मोहन भागवत 10 दिन के पश्चिम बंगाल दौरे पर पहुंचे। उन्होंने संघ पदाधिकारियों से संगठन के भविष्य के रोडमैप पर चर्चा की। करीब 10 महीने बाद 18 दिसंबर को वे फिर 4 दिन के लिए बंगाल आए और बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार का जिक्र करते हुए हिंदुओं से एकजुट होने की अपील की। मार्च-अप्रैल तक होने वाले विधानसभा चुनाव के लिहाज से ये दोनों दौरे बेहद अहम माने जा रहे हैं।

संघ सूत्रों के मुताबिक, फरवरी 2025 में भागवत ने स्वयंसेवकों को मार्च 2026 तक हर हिंदू घर तक पहुंचने का लक्ष्य दिया था। इसमें VHP कार्यकर्ता भी शामिल हैं। खासतौर पर दलित परिवारों के घर प्रवास, उनके साथ भोजन, बीमारी में अस्पताल पहुंचाने और शादी-ब्याह में मदद करने के निर्देश दिए गए। स्वयंसेवकों का दावा है कि अप्रैल 2025 से अब तक हजारों घरों तक पहुंचा जा चुका है।

कोलकाता के एक संघ कार्यकर्ता के अनुसार, बंगाल में संघ पांच प्रमुख मुद्दों पर घर-घर चर्चा कर रहा है—प्रचंड हिंदुत्व, दलितों को जोड़ना, बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति, घुसपैठ और ममता राज में महिलाओं पर हिंसा। स्वयंसेवकों को हिंदुओं के बीच यह मंत्र पहुंचाने को कहा गया है—“सभी हिंदू एक-दूसरे के भाई हैं, कोई नीच नहीं है; धर्म रक्षा और समानता हमारा संकल्प है।”

संघ का कहना है कि वह किसी पार्टी के लिए सीधे प्रचार नहीं करता, लेकिन हिंदू राष्ट्रहित में कैसी सरकार होनी चाहिए, यह बताना उसका धर्म है। संदेशखाली से बांग्लादेश सीमा की दूरी सिर्फ 15 किलोमीटर बताई जा रही है, इसलिए VHP को बंगाल में सबसे सक्रिय विंग माना जा रहा है और स्वयंसेवक व VHP कार्यकर्ता मिलकर अभियान चला रहे हैं।

  1. प्रचंड हिंदुत्व:
    भागवत ने दिसंबर दौरे में कहा कि दुनियाभर के हिंदुओं को बांग्लादेशी हिंदुओं की मदद के लिए एकजुट होना चाहिए और भारत सरकार को हस्तक्षेप करना चाहिए। RSS बंगाल यूनिट के जनरल सेक्रेटरी जिश्नू बसु का कहना है कि बंगाल भी बांग्लादेश जैसा बनता जा रहा है, लेकिन बुद्धिजीवी इस पर चुप हैं। जमीनी कार्यकर्ता बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार की कहानियां घर-घर पहुंचा रहे हैं।
  2. हिंदू एकजुटता:
    संघ पदाधिकारियों के मुताबिक, मुख्य एजेंडा हिंदुओं को एकजुट करना है। उनका कहना है कि बंगाल को बांग्लादेश बनने से बचाने के लिए ऊंच-नीच भूलकर हिंदुओं को अवेयर होना होगा और अपनी पहचान बचानी होगी।
  3. दलितों के घर भोजन और प्रवास:
    बंगाल में 30% से ज्यादा दलित आबादी है। फरवरी 2025 में स्वयंसेवकों को दलित समुदाय में प्राथमिकता से जाने, उनके घर प्रवास करने और साथ भोजन करने का निर्देश दिया गया। सवर्ण स्वयंसेवक दलितों के घरों में रहकर बराबरी का संदेश दे रहे हैं और उन्हें अपने घर भी आमंत्रित कर रहे हैं।
  4. महिलाओं पर हिंसा का मुद्दा:
    RSS सूत्रों के अनुसार, 2022 के नदिया गैंगरेप केस, आरजीकर रेप-मर्डर केस और हालिया मालदा-मुर्शिदाबाद दंगों में महिलाओं के साथ हिंसा को घर-घर चर्चा का हिस्सा बनाया गया है। आरोप है कि इन मामलों में ममता सरकार ने समय पर कार्रवाई नहीं की।
  5. घुसपैठ पर चिंता:
    संघ का कहना है कि घुसपैठ से बंगाल की डेमोग्राफी बदलने की साजिश हो रही है, जिसका उद्देश्य हिंदुओं को अल्पसंख्यक बनाना है। जनता को डेटा के जरिए यह समझाया जा रहा है।

वोट गणित पर नजर:
ममता सरकार और TMC नेता हुमायूं कबीर के बाबरी मस्जिद बयान को संघ कार्यकर्ता मुस्लिम तुष्टिकरण और पोलराइजेशन की चाल बता रहे हैं। उनका कहना है कि चुनाव में मुस्लिम वोट बंटने का खतरा कम है, लेकिन अगर हुमायूं पार्टी में नहीं लौटे तो ममता को नुकसान हो सकता है।

BJP की स्थिति पर सर्वे:
RSS के सह प्रचार प्रमुख बिप्लव रॉय के मुताबिक, संघ बेरोजगारी, आर्थिक स्थिति, अस्पतालों की हालत, शिक्षा और विकास जैसे मुद्दों पर जनता की राय जान रहा है। फरवरी के पहले हफ्ते में संघ अपनी रिपोर्ट सौंपेगा, जिसमें बताया जाएगा कि लोग किन मुद्दों पर नाराज हैं और सरकार से क्या उम्मीद कर रहे हैं।

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