द बिलियन डॉलर ब्लाइंडस्पॉट: कैसे एक भारतीय स्टार्टअप ‘Data Darkness’ के खिलाफ जंग लड़ रहा है
नई दिल्ली: जब आप भारत की चमचमाती स्काईलाइन्स या धुआंधार चल रही मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स को देखते हैं, तो आप “विकास” देखते हैं। लेकिन अगर आप थोड़ा करीब से देखें—उन साइट ऑफिसों में जहाँ धूल जमी है, या उन गोदामों में जहाँ पसीने से लथपथ मैनेजर चिल्ला रहे हैं—तो आपको एक अलग ही तस्वीर दिखेगी।
वहाँ आपको न तो AI दिखेगा, न ही क्लाउड कंप्यूटिंग। वहाँ आपको दिखेंगे—टूटे हुए Excel शीट्स, अंतहीन WhatsApp चैट, और हताश चेहरे।
इसे “Data Darkness” कहा जाता है। यह भारतीय सप्लाई चेन का वो “ब्लैक होल” है जहाँ हर साल अरबों रुपये बर्बाद हो जाते हैं।
लेकिन नोएडा के एक छोटे से ऑफिस में, एक टीम इस अंधेरे को हमेशा के लिए मिटाने की तैयारी कर रही है। मिलिए proqureX से।
द आर्किटेक्ट्स: जब IIT, IIM और बैंकिंग का मिलन हुआ
हर बड़ी स्टोरी एक “पागलपन” से शुरू होती है। अविनाश झा (CEO), जो एक सीरियल एंटरप्रेन्योर हैं, के लिए वह पल तब आया जब उन्होंने देखा कि कैसे एक मल्टी-मिलियन डॉलर प्रोजेक्ट सिर्फ इसलिए रुका पड़ा था क्योंकि एक साइट इंजीनियर को सही समय पर सीमेंट का अप्रूवल नहीं मिला।
“हम मंगल ग्रह पर रॉकेट भेज रहे हैं, लेकिन हमारी फैक्ट्रियों में आज भी मुंशी-गिरी चल रही है,” अविनाश कहते हैं। उन्हें एहसास हुआ कि इंडस्ट्री के पास ‘मसल्स’ (मशीनें) तो हैं, लेकिन ‘नर्वस सिस्टम’ (सॉफ्टवेयर) नहीं है।
लेकिन समस्या सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं थी। समस्या थी—जटिलता (Complexity)।
यहीं पर एंट्री होती है संतोष मंडल (CXO) की। स्टार्टअप्स की दुनिया में लंबा वक्त गुजार चुके और IIM लखनऊ के पूर्व छात्र संतोष ने इंडस्ट्री के एक कड़वे सच को पहचाना: ‘दुनिया का सबसे पावरफुल सॉफ्टवेयर भी बेकार है, अगर उसे कोई इस्तेमाल न करे।’ उन्होंने ठान लिया कि वे Enterprise Software की बोरिंग और जटिल दुनिया को बदल देंगे। उनका मिशन साफ़ था—सॉफ्टवेयर को इतना आसान बनाना जितना कि घर पर सोफे पर बैठकर WhatsApp चलाना। उनका यही विजन आज proqureX की सबसे बड़ी ताकत (USP) है—‘Zero-Training Interface’। यानी एक ऐसा सॉफ्टवेयर जिसे सीखने के लिए किसी मैनुअल की जरूरत नहीं।
इस तिकड़ी को पूरा किया पिंटू प्रसाद (CBO) ने। एक पूर्व बैंकर, जो बैलेंस शीट की भाषा बोलते हैं। उन्होंने टीम को सिखाया कि कोई भी CFO “AI” नहीं खरीदता, वो “बचत” (Savings) खरीदता है।
रणनीति और सुरक्षा: द साइलेंट गार्जियंस
लेकिन सिर्फ आसान सॉफ्टवेयर काफी नहीं था। इसे स्मार्ट और सुरक्षित होना था।
यहीं पर अनीश कुमार ए.एस. (CSPO) की एंट्री हुई। वे अपने साथ दो दशक का अनुभव और एक बहुराष्ट्रीय ट्रैवल टेक कंपनी (Multinational Travel Tech) में काम करने का गहरा ज्ञान लेकर आए।। अनीश ने proqureX को सिर्फ एक “टूल” से एक “रणनीतिक साझेदार” में बदल दिया। उनका विजन साफ़ था: “खरीददारी सिर्फ मोलभाव नहीं है, यह एक इकोसिस्टम है।” उन्होंने प्लेटफॉर्म को ऐसे डिजाइन करवाया कि सप्लायर्स सिर्फ वेंडर नहीं, बल्कि पार्टनर बन सकें।
और जब बात डेटा की आती है, तो सौम्या शुक्ला (Director of Security) जो भारतीय रक्षा और सुरक्षा (Indian Defence/Security) के साथ काम कर चुकी हैं, दीवार बनकर खड़ी हैं। जहाँ दुनिया AI के नाम पर क्लाइंट्स का डेटा बेच रही है, सौम्या ने proqureX में “Zero-Trust Isolation” लागू किया। उनका वादा सीधा है: “आपका डेटा सिर्फ आपके एआई एजेंट को स्मार्ट बनाता है, आपके कॉम्पिटिटर को नहीं।”
सिर्फ सॉफ्टवेयर नहीं, एक ‘डिजिटल मुंशी-जी’
proqureX ने जो बनाया है, वह सिलिकॉन वैली के किसी फैंसी प्रोडक्ट की कॉपी नहीं है। यह भारत की मिट्टी से उपजा समाधान है।
वे इसे “proqX AI Agent” कहते हैं, लेकिन क्लाइंट्स इसे प्यार से “AI मुंशी-जी” बुलाते हैं।
सोचिए, एक ऐसा डिजिटल एम्प्लॉई जो 24/7 काम करता है:
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यह आपके लिए वेंडर्स से मोलभाव (Negotiate) करता है।
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यह 50 पन्नों के लीगल कॉन्ट्रैक्ट को सेकंडों में स्कैन कर जोखिम बता देता है।
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यह भविष्यवाणी करता है—“साहब, अगले हफ्ते स्टील महंगा होने वाला है, आज ही स्टॉक कर लीजिए।”
नतीजा? Bootes और Aerobe जैसे दिग्गजों ने अपने मार्जिन में सीधा सुधार देखा है। जहाँ पुराने ERP फेल हो गए, वहाँ proqureX ने 100% एडॉप्शन हासिल किया।
फैसला: 2026 और उससे आगे
विदेशी दिग्गज SAP और Oracle दशकों से राज कर रहे हैं। लेकिन proqureX एक नई लहर का संकेत है—“Made in India, Built for the World.”
यह अब सिर्फ एक स्टार्टअप की कहानी नहीं है। यह एक बदलाव है कि हम बिज़नेस कैसे करते हैं। proqureX यह साबित कर रहा है कि भविष्य “जटिलता” में नहीं, बल्कि “इंटेलिजेंस” में है।
क्या proqureX अगला यूनिकॉर्न बनेगा? यह तो वक्त बताएगा। लेकिन एक बात तय है—सप्लाई चेन का अंधेरा अब छंटने लगा है।
