G-RAM-G (जी-राम-जी) योजना: विकसित भारत की नींव और ग्रामीण आजीविका का नया प्रतिमान

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वर्ष 2026 की शुरुआत के साथ, भारत सरकार ने ग्रामीण विकास के अपने दृष्टिकोण में एक क्रांतिकारी बदलाव किया है। पिछले दो दशकों से ग्रामीण भारत की जीवनरेखा रही ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम’ (मनरेगा) ने संकट के समय में करोड़ों लोगों को सहारा दिया है। लेकिन, ‘विकसित भारत’ के संकल्प को पूरा करने के लिए केवल गड्ढे खोदना और भरना पर्याप्त नहीं है।

ग्रामीण भारत को अब केवल ‘अकुशल श्रम’ के केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि ‘कुशल मानव संसाधन’ और ‘आर्थिक गतिविधियों’ के केंद्र के रूप में देखने की जरूरत है। इसी विजन के साथ, सरकार ने G-RAM-G, यानी ‘विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ (Viksit Bharat – Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin)) लॉन्च किया है। यह योजना मनरेगा का अंत नहीं, बल्कि उसका एक उन्नत, आधुनिक और भविष्योन्मुखी संस्करण (Evolution) है।

G-RAM-G का मुख्य दर्शन: ‘रोजगार’ से आगे ‘आजीविका’ तक

G-RAM-G के केंद्र में यह समझ है कि ग्रामीण व्यक्ति को केवल साल में 100 दिन का दिहाड़ी काम नहीं चाहिए, बल्कि उसे एक सम्मानजनक, टिकाऊ ‘आजीविका’ (Sustainable Livelihood) की आवश्यकता है।

यह मिशन ग्रामीण भारत में ‘रोजगार की गारंटी’ के साथ-साथ ‘कौशल विकास’ और ‘परिसंपत्ति निर्माण’ (Asset Creation) को एकीकृत करता है, ताकि ग्रामीण आबादी भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए तैयार हो सके।

G-RAM-G योजना की मुख्य विशेषताएं (Key Features)

  1. श्रेणीबद्ध रोजगार (Tiered Employment): मनरेगा के विपरीत, जो मुख्य रूप से अकुशल शारीरिक श्रम पर केंद्रित थी, G-RAM-G रोजगार को तीन स्तरों में बांटती है:

    • अकुशल श्रम (Unskilled): बुनियादी शारीरिक कार्य।

    • अर्ध-कुशल (Semi-Skilled): जैसे राजमिस्त्री का सहायक, डेटा एंट्री ऑपरेटर (पंचायत स्तर पर)।

    • कुशल (Skilled): जैसे मशीन ऑपरेटर, सौर ऊर्जा तकनीशियन, कृषि-ड्रोन पायलट।

    • विशेषता: इसमें कुशल श्रमिकों के लिए मजदूरी दर अकुशल श्रमिकों से काफी अधिक होगी, जो कौशल सीखने के लिए प्रोत्साहन का काम करेगी।

  2. ‘कौशल के बदले काम’ (Work for Skill): G-RAM-G के तहत, एक श्रमिक अपने गारंटीकृत दिनों का एक हिस्सा ‘ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग’ या कौशल विकास केंद्रों में प्रशिक्षण लेने में बिता सकता है, और इसके लिए उसे भुगतान किया जाएगा।

  3. भविष्योन्मुखी परिसंपत्ति निर्माण (Future-Ready Asset Creation): अब फोकस केवल कच्चे रास्ते या तालाब बनाने पर नहीं होगा। G-RAM-G के तहत बनाई जाने वाली संपत्तियां आधुनिक होंगी:

    • ग्रामीण डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे फाइबर ऑप्टिक केबल बिछाने में सहायता)।

    • जलवायु-लचीला बुनियादी ढांचा (Climate Resilient Infrastructure)।

    • सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली और आधुनिक कृषि भंडारण गोदाम।

  4. तकनीक का एकीकरण: योजना के कार्यान्वयन में ड्रोन द्वारा निगरानी, जियो-टैगिंग, और आधार-आधारित भुगतान प्रणाली को अनिवार्य किया गया है ताकि लीकेज को शून्य किया जा सके और पारदर्शिता बनी रहे।

  5. उद्यमिता से जुड़ाव (Linkage to Entrepreneurship): जो लाभार्थी G-RAM-G के तहत कौशल प्राप्त करेंगे, उन्हें अपना सूक्ष्म उद्यम शुरू करने के लिए ‘मुद्रा योजना’ या ‘पीएम विश्वकर्मा योजना’ के तहत प्राथमिकता के आधार पर ऋण उपलब्ध कराया जाएगा।

विश्लेषण: G-RAM-G योजना MANREGA से कैसे अलग है?

यह समझना महत्वपूर्ण है कि G-RAM-G, मनरेगा का प्रतिस्थापन (replacement) नहीं, बल्कि उसका उन्नयन (upgrade) है। यह मनरेगा की नींव पर खड़ा एक नया ढांचा है।

विशेषता मनरेगा (MNREGA) G-RAM-G (जी-राम-जी) – 2026
मूल उद्देश्य संकट के समय राहत (Distress Relief) और सामाजिक सुरक्षा। सतत आजीविका, कौशल विकास और आर्थिक सशक्तिकरण।
श्रम की प्रकृति मुख्य रूप से 100% अकुशल शारीरिक श्रम (Unskilled Manual Labour)। अकुशल, अर्ध-कुशल और कुशल श्रम का मिश्रण (Tiered structure)।
फोकस (Focus) ‘काम का अधिकार’ सुनिश्चित करना और भुखमरी रोकना। ‘काम’ के साथ ‘कौशल’ और ‘उद्यमिता’ को जोड़ना।
परिसंपत्ति की गुणवत्ता अक्सर कच्ची और कम टिकाऊ संपत्तियों का निर्माण (जैसे मिट्टी के बांध, कच्ची सड़कें)। टिकाऊ और उत्पादक संपत्तियां (जैसे डिजिटल इन्फ्रा, आधुनिक जल संचयन, वेयरहाउस)।
कौशल विकास कोई प्रत्यक्ष प्रावधान नहीं। ‘कौशल प्रशिक्षण’ को सवेतन कार्य का हिस्सा माना गया है।
परिणाम (Outcome) अल्पकालिक आय सहायता। दीर्घकालिक रोजगार क्षमता (Employability) में वृद्धि।
दृष्टिकोण एक ‘कल्याणकारी’ (Welfare) योजना। एक ‘विकासात्मक’ (Developmental) और ‘आर्थिक’ मिशन।
तकनीक का प्रयोग मुख्य रूप से हाजिरी और भुगतान तक सीमित। योजना, निगरानी, परिसंपत्ति प्रबंधन और कौशल मैपिंग में एआई और ड्रोन का उपयोग।

चुनौतियां और आगे की राह

G-RAM-G एक महत्वाकांक्षी योजना है और 2026 में इसके क्रियान्वयन में कई चुनौतियां भी हैं:

  1. प्रशिक्षण बुनियादी ढांचा: ग्रामीण स्तर पर उच्च गुणवत्ता वाले कौशल प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करना एक बड़ी चुनौती होगी।

  2. डिजिटल डिवाइड: कुशल कार्यों के लिए डिजिटल साक्षरता की आवश्यकता होगी, जो अभी भी ग्रामीण भारत के कुछ हिस्सों में एक बाधा है।

  3. नौकरशाही का रवैया: स्थानीय प्रशासन को ‘काम देने’ की मानसिकता से ‘कौशल विकसित करने’ की मानसिकता में बदलना होगा।

निष्कर्ष

G-RAM-G (विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन) भारत की ग्रामीण नीति में एक निर्णायक मोड़ है। यह स्वीकार करता है कि 2047 का भारत केवल फावड़े और कुदाल के सहारे नहीं बनाया जा सकता।

मनरेगा ने ग्रामीण भारत को जीवित रखा; G-RAM-G का लक्ष्य उसे समृद्ध बनाना है। यदि इसे प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो G-RAM-G ग्रामीण भारत को ‘विकसित भारत’ के विकास इंजन में बदल सकता है, जहां गांव का युवा केवल मजदूरी नहीं, बल्कि हुनर और उद्यम की आकांक्षा रखेगा।

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