दिल्ली दंगे ‘साजिश’ मामला: सुप्रीम कोर्ट में बड़ा दिन, लेकिन उमर खालिद और शरजील इमाम को तत्काल राहत नहीं, लंबी कानूनी लड़ाई जारी
उमर खालिद और शरजील इमाम। (Photo Credit: AI Generated Image)
दिल्ली दंगे ‘साजिश’ मामला: सुप्रीम कोर्ट में बड़ा दिन, लेकिन उमर खालिद और शरजील इमाम को तत्काल राहत नहीं, लंबी कानूनी लड़ाई जारी
फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली को झुलसा देने वाले सांप्रदायिक दंगों के पीछे की कथित ‘बड़ी साजिश’ (Larger Conspiracy) के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में बहुप्रतीक्षित सुनवाई हुई। जैसा कि मुद्दा लाइव ने अपनी पिछली रिपोर्ट्स में रेखांकित किया था, पूरे देश की निगाहें जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं पर टिकी थीं, जो पिछले कई सालों से UAPA जैसी गंभीर धाराओं के तहत जेल में बंद हैं।
आज के अदालती घटनाक्रम के बाद जो तस्वीर सामने आई है, वह यह है कि इन दोनों हाई-प्रोफाइल आरोपियों को तुरंत जेल से बाहर आने की राहत नहीं मिली है और उनकी कानूनी लड़ाई और लंबी खिंच गई है।
क्या है पूरा मामला?
मुद्दा लाइव की रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा दर्ज FIR 59/2020 से संबंधित है। पुलिस का दावा है कि सीएए (CAA) विरोधी प्रदर्शनों की आड़ में एक गहरी साजिश रची गई थी, जिसका उद्देश्य अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की भारत यात्रा के दौरान दंगों को भड़काना था, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत सरकार को बदनाम किया जा सके। इन दंगों में 53 लोगों की जान गई थी।
पुलिस ने अपनी चार्जशीट में उमर खालिद और शरजील इमाम को इस साजिश के प्रमुख ‘मास्टरमाइंड’ और ‘षड्यंत्रकारी’ बताया है।
अदालत में आज क्या हुआ? (फैसले का सार)
आज सुप्रीम कोर्ट में जो हुआ, वह इन दोनों आरोपियों और उनके समर्थकों के लिए किसी ‘एंटी-क्लाइमेक्स’ से कम नहीं रहा। उन्हें वो निर्णायक राहत नहीं मिल पाई जिसकी उम्मीद की जा रही थी।
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उमर खालिद: उमर खालिद के लिए जेल से बाहर आने का रास्ता अभी नहीं खुला है। कानूनी पेचीदगियों और लंबी सुनवाई के बाद, जमीनी स्थिति यह है कि उन्हें अभी जेल में ही रहना होगा। उनकी कानूनी टीम अब बदली हुई परिस्थितियों और लंबे समय तक जेल में रहने (incarceration) के आधार पर निचली अदालतों के माध्यम से जमानत के लिए नए सिरे से प्रयास करने की रणनीति पर काम कर रही है। सुप्रीम कोर्ट से उन्हें आज रिहाई का अंतिम आदेश प्राप्त नहीं हुआ।
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शरजील इमाम: शरजील इमाम का मामला भी कानूनी भूलभुलैया में फंसा हुआ है। यद्यपि उन्हें कुछ समय पहले राजद्रोह (Sedition) के एक अलग मामले में वैधानिक जमानत (Statutory Bail) मिलने की खबरें आई थीं क्योंकि उन्होंने उस अपराध के लिए तय अधिकतम सजा का आधा हिस्सा काट लिया था, लेकिन मुख्य UAPA साजिश मामले में वे अभी भी जेल में हैं। सुप्रीम कोर्ट में आज की कार्यवाही के बाद भी उनकी तत्काल रिहाई संभव नहीं हो पाई है।
जमानत मिलने में क्यों आ रही है बाधा?
जैसा कि मुद्दा लाइव के विश्लेषणों में पहले भी जिक्र किया गया है, इस मामले में जमानत मिलने में सबसे बड़ी बाधा UAPA (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) कानून की कठोर शर्तें हैं। इस कानून के तहत, यदि अदालत को लगता है कि पुलिस द्वारा लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया (prima facie) सही हैं, तो जमानत देना लगभग असंभव हो जाता है।
इससे पहले, दिल्ली हाई कोर्ट ने उमर खालिद की जमानत याचिका खारिज करते हुए तल्ख टिप्पणी की थी कि उनके खिलाफ आरोप प्रथम दृष्टया सही प्रतीत होते हैं। उनका अमरावती में दिया गया भाषण और कथित गुप्त बैठकें जांच एजेंसियों के केंद्र में रही हैं। इसी तरह, शरजील इमाम पर भी भड़काऊ भाषणों के जरिए देश की अखंडता को चुनौती देने के गंभीर आरोप हैं।
निष्कर्ष
आज के घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि उमर खालिद और शरजील इमाम के लिए न्याय की लड़ाई अभी बहुत लंबी है। बचाव पक्ष जहां इसे ‘प्रक्रिया को ही सजा बनाना’ (process is the punishment) बता रहा है, वहीं अभियोजन पक्ष इन्हें राष्ट्र की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा मानता है। फिलहाल, दोनों को अपनी रिहाई के लिए और इंतजार करना होगा।
