बांग्लादेश में सिविल वॉर का खतरा; सेना के भीतर गुटबाजी, हिंसा के पीछे सत्ता पलट की साजिश

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Bangladesh

बांग्लादेश में मौजूदा हालात तेजी से अस्थिर होते नजर आ रहे हैं। 12 दिसंबर 2025 को ढाका में प्रचार के दौरान छात्र नेता और निर्दलीय चुनाव प्रत्याशी शरीफ उस्मान हादी पर अज्ञात हमलावरों ने गोली चलाई। गंभीर रूप से घायल हादी को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां छह दिन तक चले इलाज के बाद 18 दिसंबर को उनकी मौत हो गई। हादी की मौत के बाद ढाका समेत कई इलाकों में हिंसा भड़क उठी। अब तक कम से कम 7 हिंदुओं की हत्या हो चुकी है, जबकि हिंदुओं के घरों और मंदिरों में आगजनी की घटनाएं भी सामने आई हैं। छात्र संगठनों का आरोप है कि पुलिस और सेना ने समय रहते कार्रवाई नहीं की, जिससे हालात बेकाबू हो गए।

 

चुनाव से पहले सेना और अंतरिम सरकार में टकराव

शेख हसीना सरकार के पतन के बाद बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार चल रही है। देश में 12 फरवरी 2026 को चुनाव प्रस्तावित हैं, जो ऐसे समय हो रहे हैं जब अवामी लीग पहली बार चुनाव मैदान में नहीं होगी। सुरक्षा को लेकर सेना ने अलग इंटेलिजेंस यूनिट बनाई है। हालांकि, चुनाव की तारीख और नीतिगत फैसलों को लेकर सरकार और सेना के बीच तनाव खुलकर सामने आया है। सेना प्रमुख वकार-उज-जमान ने पहले ही स्पष्ट किया था कि चुनाव में देरी स्वीकार्य नहीं होगी। इसके अलावा म्यांमार सीमा से जुड़े प्रस्तावित कॉरिडोर और रोहिंग्या शरणार्थियों के मुद्दे पर भी सेना और सरकार आमने-सामने हैं।

सेना का एक धड़ा सत्ता में आना चाहता है

छात्रों की पार्टी NCP और अन्य संगठनों का दावा है कि बांग्लादेशी सेना के भीतर एक धड़ा ऐसा है जो चुनाव नहीं होने देना चाहता और अंतरिम सरकार को हटाने की कोशिश कर रहा है। उनका आरोप है कि हालिया टारगेट किलिंग और हिंसा के पीछे सेना और एजेंसियों का यही गुट सक्रिय है। नेताओं का कहना है कि पुलिस और सेना की निष्क्रियता संयोग नहीं, बल्कि सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकती है। सेना के भीतर भी स्पष्ट विभाजन की बात सामने आ रही है—एक हिस्सा सरकार के साथ खड़ा है, जबकि दूसरा उसके खिलाफ।

पाकिस्तान और जमात कनेक्शन के आरोप

राजनीतिक विश्लेषकों का आरोप है कि बांग्लादेश में बढ़ती हिंसा के पीछे पाकिस्तान समर्थक तत्व सक्रिय हैं। कहा जा रहा है कि पाकिस्तान की ISI ने अपने हैंडलर्स के जरिए भ्रम फैलाने की कोशिश की और सेना के भीतर मौजूद जमात समर्थक धड़े को सक्रिय किया। आरोप है कि यह गुट बांग्लादेश को कट्टरपंथ की ओर ले जाना चाहता है और अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है।

क्या तख्तापलट या सिविल वॉर की ओर बढ़ रहा देश?

सेना के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल सेना सीधे सत्ता में हस्तक्षेप से बच रही है और चुनाव तक सुरक्षा बनाए रखने पर फोकस कर रही है। भारत और म्यांमार सीमा पर भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। हालांकि, अगर चुनाव के बाद स्पष्ट बहुमत नहीं मिला या हिंसा और बढ़ी, तो सेना के एक धड़े द्वारा तख्तापलट की कोशिश की जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अभी सिविल वॉर की आशंका कम है, लेकिन हालात बेहद नाजुक हैं और आने वाले चुनाव बांग्लादेश के राजनीतिक भविष्य के लिए निर्णायक साबित होंगे।

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