IPO बाजार में नए साल का धमाका: अगले हफ्ते खुलेंगे कमाई के 5 नए मौके, SME सेगमेंट में मची हलचल

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भारतीय शेयर बाजार में साल 2026 की शुरुआत बेहद शानदार तरीके से हो रही है। प्राइमरी मार्केट, यानी आईपीओ बाजार, जो पिछले कुछ वर्षों से निवेशकों के लिए कमाई का बड़ा जरिया बना हुआ है, नए साल के पहले हफ्ते में ही गुलजार होने को तैयार है। ईटी नाउ स्वदेश की एक रिपोर्ट के अनुसार, अगले सप्ताह एक या दो नहीं, बल्कि कुल पांच कंपनियों के आईपीओ निवेश के लिए खुलने जा रहे हैं। ये सभी आईपीओ एसएमई (SME) सेगमेंट के हैं, जो हाल के दिनों में अपने बंपर लिस्टिंग गेन के लिए मशहूर रहा है।

SME IPOs की बाढ़: कौन सी कंपनियां आ रही हैं?

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, अगले हफ्ते जो पांच कंपनियां बाजार में दस्तक देने वाली हैं, वे अलग-अलग और महत्वपूर्ण सेक्टरों से जुड़ी हैं। यह विविधता निवेशकों के लिए चुनाव के ज्यादा विकल्प खोलेगी।

ये हैं वो 5 कंपनियां जिनके आईपीओ अगले हफ्ते आने वाले हैं:

  1. भारत कोकिंग कोल (Bharat Coking Coal – BCCL): इस सूची में यह नाम सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला है। BCCL आमतौर पर एक बड़ी सरकारी कोयला कंपनी के रूप में जानी जाती है। अगर यह वही इकाई या उससे जुड़ी कोई सहायक कंपनी है जो एसएमई प्लेटफॉर्म पर आ रही है, तो यह बाजार के लिए बहुत बड़ी खबर होगी। यह ऊर्जा क्षेत्र में निवेशकों की रुचि को परखने का एक बड़ा मौका होगा।

  2. विक्ट्री इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (Victory Electric Vehicles): भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का बाजार जबरदस्त तेजी पर है। सरकार की नीतियों और बढ़ती मांग के कारण EV सेक्टर की कंपनियां निवेशकों की पहली पसंद बनी हुई हैं। ‘विक्ट्री इलेक्ट्रिक व्हीकल्स’ का आईपीओ इस हॉट सेक्टर में निवेश का एक और मौका लेकर आ रहा है।

  3. डेफरेल टेक्नोलॉजीज (Defrail Technologies): जैसा कि नाम से ही संकेत मिलता है, यह कंपनी संभवतः रक्षा (Defence) और रेलवे (Railways) क्षेत्र के लिए तकनीक या उपकरण मुहैया कराती है। ये दोनों ही क्षेत्र भारत सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ और बुनियादी ढांचे के विकास के एजेंडे में सबसे ऊपर हैं। डिफेंस और रेलवे शेयरों ने पिछले कुछ समय में शानदार रिटर्न दिया है, जिससे इस आईपीओ के प्रति आकर्षण बढ़ सकता है।

  4. गैबियन टेक्नोलॉजीज (Gabion Technologies): ‘गैबियन’ तकनीक का इस्तेमाल आमतौर पर बुनियादी ढांचे, जैसे कि सड़कों, पुलों और बाढ़ नियंत्रण में दीवारों को मजबूत बनाने के लिए किया जाता है। यह कंपनी इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर से जुड़ी हुई लगती है, जो कि देश के विकास का एक प्रमुख स्तंभ है।

  5. यजुर फाइबर्स (Yajur Fibres): यह कंपनी टेक्सटाइल (कपड़ा) उद्योग से जुड़ी है। भारत का टेक्सटाइल सेक्टर निर्यात और घरेलू खपत दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। यह देखना दिलचस्प होगा कि कंपनी किस तरह के विशेष फाइबर या उत्पाद बनाती है।

SME सेगमेंट में क्यों है इतनी हलचल? (विश्लेषण)

मेनबोर्ड आईपीओ की तुलना में एसएमई आईपीओ का बाजार आकार छोटा होता है, लेकिन यहां हलचल बहुत तेज है। इसके पीछे कुछ प्रमुख कारण हैं:

  • बंपर लिस्टिंग गेन की उम्मीद: पिछले कुछ सालों में कई एसएमई आईपीओ ने लिस्टिंग के दिन ही निवेशकों का पैसा दोगुना या उससे भी ज्यादा किया है। इस भारी रिटर्न के लालच में खुदरा (Retail) और एचएनआई (HNI) निवेशक इस सेगमेंट की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

  • छोटा इश्यू साइज: एसएमई कंपनियों के आईपीओ का आकार आमतौर पर छोटा होता है (अक्सर 50 करोड़ रुपये से कम)। कम शेयरों की आपूर्ति और अत्यधिक मांग के कारण, अक्सर इन आईपीओ को भारी ‘ओवरसब्सक्रिप्शन’ मिलता है, जिससे लिस्टिंग पर कीमतें उछल जाती हैं।

  • विकासशील कंपनियां: ये छोटी कंपनियां होती हैं जिनमें विकास की अपार संभावनाएं होती हैं। निवेशक इन कंपनियों को उनके शुरुआती दौर में पकड़ना चाहते हैं ताकि भविष्य में वे मल्टीबैगर बन सकें।

निवेशकों के लिए सलाह: सावधानी भी है जरूरी

हालांकि एसएमई आईपीओ में कमाई के मौके बहुत हैं, लेकिन इसमें जोखिम भी मेनबोर्ड आईपीओ से कहीं ज्यादा होता है:

  • लिक्विडिटी की समस्या: एसएमई प्लेटफॉर्म पर लिस्ट होने के बाद शेयरों को बेचना कभी-कभी मुश्किल हो सकता है क्योंकि वहां खरीदारों और विक्रेताओं की संख्या कम होती है।

  • लॉट साइज: एसएमई में आप एक या दो शेयर नहीं खरीद सकते, आपको पूरा एक लॉट खरीदना और बेचना होता है, जिसके लिए ज्यादा पूंजी की आवश्यकता होती है।

  • जानकारी का अभाव: बड़ी कंपनियों की तुलना में छोटी कंपनियों के बारे में जानकारी और रिसर्च रिपोर्ट कम उपलब्ध होती हैं।

निष्कर्ष

अगला हफ्ता निश्चित रूप से आईपीओ निवेशकों के लिए व्यस्त रहने वाला है। ऊर्जा, ईवी, डिफेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे विविध क्षेत्रों की कंपनियों का एक साथ आना बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे केवल लिस्टिंग गेन के पीछे न भागें, बल्कि निवेश करने से पहले कंपनी के बिजनेस मॉडल, वित्तीय स्थिति और प्रमोटरों की पृष्ठभूमि की गहन जांच करें या अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें।

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