T20 वर्ल्ड कप 2026: भारत में खेलने से बांग्लादेश का ‘परहेज’, क्रिकेट के मैदान पर कूटनीतिक कड़वाहट की सीधी घुसपैठ
क्रिकेट को अक्सर भारतीय उपमहाद्वीप में तनाव कम करने वाला ‘मरहम’ और दूरियां पाटने वाला ‘पुल’ माना जाता रहा है। हमने ‘क्रिकेट डिप्लोमेसी’ के कई दौर देखे हैं। लेकिन, 2026 टी20 वर्ल्ड कप को लेकर जो खबरें छनकर आ रही हैं, वे यह बताने के लिए काफी हैं कि मौजूदा दौर में यह पुल ढह चुका है।
बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) से यह अनुरोध करना कि उनके ग्रुप स्टेज के मैच भारत में न कराए जाएं, एक भारतीय क्रिकेट प्रेमी और पत्रकार के तौर पर, निराशाजनक तो है, लेकिन चौंकाने वाला बिल्कुल नहीं है।
यह खबर सिर्फ एक टूर्नामेंट के शेड्यूल या वेन्यू में बदलाव भर नहीं है। यह इस कड़वी हकीकत का सबूत है कि भारत और बांग्लादेश के बीच के राजनीतिक और कूटनीतिक तनाव ने अब पूरी तरह से खेल के मैदान को अपनी गिरफ्त में ले लिया है।
‘सुरक्षा’ का बहाना, निशाना ‘सियासत’
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, BCB चाहता है कि चूंकि श्रीलंका इस टूर्नामेंट का सह-मेजबान है, इसलिए उनके मैच वहां शिफ्ट कर दिए जाएं। ICC भी कथित तौर पर ‘सुरक्षा प्रोटोकॉल’ का हवाला देकर इसे मानने पर विचार कर रहा है।
एक भारतीय पत्रकार के तौर पर, मुझे यह कहने में कोई गुरेज नहीं है कि यहां ‘सुरक्षा’ तो महज एक सुविधाजनक शब्द है। असल मुद्दा बदली हुई भू-राजनीति (Geopolitics) है।
हमने 2023 में ही एक भव्य और सफल वनडे विश्व कप की मेजबानी की है, जिसमें पाकिस्तान जैसी टीम ने भी बिना किसी बड़ी बाधा के हिस्सा लिया। भारत में अंतरराष्ट्रीय टीमों की सुरक्षा कभी मुद्दा नहीं रही। इसलिए, बांग्लादेश का यह डर सुरक्षा से ज्यादा अगस्त 2024 में ढाका में हुए सत्ता परिवर्तन और उसके बाद वहां पनपी भारत विरोधी भावनाओं से उपजा है।
यह अनुरोध ढाका के नए निजाम का नई दिल्ली को दिया गया एक स्पष्ट कूटनीतिक संदेश (Diplomatic Snub) है कि वे मौजूदा हालात में भारत के साथ सामान्य संबंध—यहां तक कि खेल के मैदान पर भी—रखने के इच्छुक नहीं हैं।
BCCI और ICC की व्यावहारिक चुप्पी?
इस पूरे घटनाक्रम में दुनिया के सबसे शक्तिशाली क्रिकेट बोर्ड, BCCI की प्रतिक्रिया दिलचस्प होगी। सार्वजनिक रूप से भले ही कुछ न कहा जाए, लेकिन रणनीतिक तौर पर BCCI भी शायद इस बदलाव का ज्यादा विरोध न करे।
क्यों? क्योंकि अगर बांग्लादेश की टीम मौजूदा तनावपूर्ण माहौल में भारत आती है, और यहां किसी भी तरह का विरोध प्रदर्शन या अप्रिय घटना होती है, तो इससे एक वैश्विक टूर्नामेंट के मेजबान के तौर पर भारत की छवि धूमिल होगी। ऐसे में, मैच को चुपचाप श्रीलंका शिफ्ट कर देना ही सभी पक्षों (ICC, BCCI और BCB) के लिए सबसे ‘सुरक्षित’ और व्यावहारिक विकल्प नजर आता है।
एक खतरनाक नजीर और खेल की हार
यह घटनाक्रम दक्षिण एशियाई क्रिकेट के लिए एक बहुत बुरा संकेत है। हम पहले ही पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय सीरीज नहीं खेलते, उनके यहां एशिया कप खेलने नहीं जाते। अब अगर बांग्लादेश जैसा पड़ोसी देश भी, जिसके साथ हमारे ऐतिहासिक संबंध रहे हैं, भारत में खेलने से कतराने लगेगा, तो उपमहाद्वीप में क्रिकेट का भविष्य क्या है?
एक ऐसे समय में जब भारत 2036 ओलंपिक की मेजबानी का दावा ठोक रहा है और खुद को एक ‘स्पोर्टिंग सुपरपावर’ के रूप में पेश कर रहा है, अपने ही पड़ोस में खेल का यह राजनीतिकरण चिंता का विषय है।
2026 टी20 वर्ल्ड कप शुरू होने में अभी वक्त है, लेकिन कूटनीति की पिच पर खेला गया यह पहला ‘मैच’ इस बात का गवाह है कि दुर्भाग्य से, एक बार फिर ‘जेंटलमैन गेम’ राजनीति की भेंट चढ़ गया है।
