इंदौर मैच से पहले महाकाल पहुंचे कोहली–कुलदीप; भस्म आरती में दो घंटे बैठे, गंभीर, राहुल ने भी उज्जैन-नलखेड़ा में की पूजा
भारत और न्यूजीलैंड के बीच इंदौर में खेले जाने वाले अहम मुकाबले से पहले टीम इंडिया के खिलाड़ियों ने आध्यात्मिक आस्था का रास्ता चुना। स्टार बल्लेबाज विराट कोहली और स्पिनर कुलदीप यादव शनिवार तड़के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे। दोनों ने त्रिपुंड तिलक लगवाया और भस्म आरती में शामिल हुए। सुबह करीब 4 बजे मंदिर पहुंचे कोहली और कुलदीप करीब दो घंटे तक नंदी हॉल में बैठकर आरती देखते रहे और इस दौरान जाप करते नजर आए। मैच रविवार को होलकर स्टेडियम में खेला जाना है।
तड़के दर्शन, नंदी हॉल में जाप करते दिखे खिलाड़ी
महाकाल मंदिर में भस्म आरती के दौरान कोहली और कुलदीप पूरी तरह ध्यानमग्न दिखाई दिए। दोनों खिलाड़ियों ने शांत भाव से नंदी हॉल में बैठकर आरती देखी। भस्म आरती के बाद उन्होंने भगवान महाकाल को जल अर्पित किया और नंदी जी का विधिवत पूजन-अर्चन किया। इसके बाद मंदिर की देहरी से भगवान महाकाल के दर्शन किए। इस मौके पर महाकाल मंदिर समिति की ओर से दोनों खिलाड़ियों का सम्मान भी किया गया।
कुलदीप बोले- महाकाल का आशीर्वाद बना रहे, यही कामना
दर्शन के बाद कुलदीप यादव ने कहा कि महाकाल मंदिर आकर उन्हें बहुत अच्छा लगा। उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि क्रिकेट के साथ-साथ हमारी निजी जिंदगी में भी सब अच्छा चलता रहे। भगवान महाकाल का आशीर्वाद सब पर बना रहे, यही प्रार्थना है।” बता दें कि विराट कोहली और कुलदीप यादव पहले भी महाकाल मंदिर में दर्शन के लिए आ चुके हैं। विराट का उज्जैन से आध्यात्मिक जुड़ाव पहले भी कई मौकों पर देखने को मिला है।
टीम इंडिया के अन्य सदस्यों ने भी किए धार्मिक दर्शन
टीम इंडिया इंदौर पहले ही पहुंच चुकी है। खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ के बीच धार्मिक स्थलों पर जाने का सिलसिला भी जारी है। शुक्रवार को भारतीय टीम के हेड कोच गौतम गंभीर आगर मालवा जिले के नलखेड़ा स्थित विश्व प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने हवन-अनुष्ठान में भाग लिया और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा की। पूजा के बाद गंभीर ने कुछ समय मंदिर परिसर में बिताया। गर्भगृह में मुख्य पुजारी दिनेश गुरु ने उन्हें माता की चुनरी ओढ़ाई। इसी दौरान, क्रिकेटर केएल राहुल भी उज्जैन पहुंचे और महाकाल मंदिर में पूजा-अर्चना की। टीम इंडिया के खिलाड़ियों और कोच का यह आध्यात्मिक रुख यह दिखाता है कि बड़े मुकाबले से पहले मानसिक शांति और आत्मविश्वास के लिए वे आस्था का सहारा ले रहे हैं।
