वोडाफोन आइडिया (Vi) का भविष्य: सरकार की ‘एग्जिट’ योजना, प्रतिस्पर्धा की चिंता और ‘इंडिगो’ से मिली सीख

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भारतीय टेलीकॉम सेक्टर की तीसरी सबसे बड़ी निजी कंपनी, वोडाफोन आइडिया (Vi), पिछले कुछ महीनों से लगातार सुर्खियों में है। पहले 18,000 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (FPO) की सफलता और अब कंपनी में सबसे बड़े हिस्सेदार—भारत सरकार—की भविष्य की योजनाओं को लेकर बाजार में हलचल है।

हालिया रिपोर्ट्स (TelecomTalk के आधार पर) बताती हैं कि भारत सरकार, जो वर्तमान में Vi में लगभग 33% की हिस्सेदारी रखती है, कंपनी से हमेशा के लिए जुड़े रहने के मूड में नहीं है। सरकार के पास एक स्पष्ट ‘एग्जिट प्लान’ (बाहर निकलने की योजना) है, लेकिन यह योजना सिर्फ पैसे निकालने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ी बाजार रणनीति भी है।

आइए समझते हैं कि सरकार की यह योजना क्या है और इसमें बाजार की प्रतिस्पर्धा का कोण कितना महत्वपूर्ण है।

सरकार हिस्सेदार क्यों बनी थी?

सबसे पहले यह याद रखना जरूरी है कि सरकार Vi की मालिक क्यों बनी। यह कोई रणनीतिक निवेश नहीं था, बल्कि एक मजबूरी थी।

जब वोडाफोन आइडिया सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) का भारी-भरकम बकाया चुकाने में असमर्थ हो गई, तो कंपनी दिवालिया होने के कगार पर थी। अगर Vi डूब जाती, तो भारतीय बाजार में सिर्फ दो ही खिलाड़ी बचते—रिलायंस जियो और भारती एयरटेल। इस ‘डुपोली’ (Duopoly) की स्थिति से उपभोक्ताओं को बचाने और सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए, सरकार ने कंपनी के ऊपर बकाये ब्याज को इक्विटी (शेयरों) में बदलने का फैसला किया।

इस तरह, न चाहते हुए भी सरकार Vi की सबसे बड़ी शेयरधारक बन गई।

सरकार का ‘एग्जिट प्लान’ (The Exit Plan) और शर्तें

रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार का टेलीकॉम कंपनी चलाने का कोई इरादा नहीं है। उनका उद्देश्य केवल कंपनी को तत्काल डूबने से बचाना था, जो अब FPO की सफलता के बाद पूरा हो चुका है। सरकार अब अपनी हिस्सेदारी बेचकर बाहर निकलने की योजना बना रही है, लेकिन यह दो प्रमुख शर्तों पर निर्भर करेगा:

  1. कंपनी का स्थिर होना: Vi को FPO के पैसों से अपना नेटवर्क सुधारना होगा और ग्राहकों का पलायन रोकना होगा। जब कंपनी स्थिर हो जाएगी, तभी सरकार एग्जिट पर विचार करेगी।

  2. संभावित ‘रिलीफ पैकेज’: सरकार चाहती है कि एग्जिट से पहले सुप्रीम कोर्ट के जरिए या अन्य माध्यमों से Vi को AGR बकाये पर कुछ राहत मिल जाए, जिससे कंपनी का वैल्यूएशन बेहतर हो सके।

सरकार का असली लक्ष्य: ‘मुनाफा’ और ‘सही हाथ’ (The Indigo Angle)

यह लेख का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। सरकार का लक्ष्य केवल अपनी हिस्सेदारी बेचकर वित्तीय नुकसान से बचना नहीं है, बल्कि एक स्वस्थ बाजार सुनिश्चित करना भी है।

1. नुकसान नहीं, मुनाफा चाहिए: सरकार का रुख साफ है कि वे संकट के समय में आए थे, लेकिन वे घाटे में अपनी हिस्सेदारी नहीं बेचेंगे। वे चाहते हैं कि कंपनी की स्थिति सुधरे और शेयर की कीमत उनके प्रवेश मूल्य से ऊपर जाए, ताकि वे एक सम्मानजनक मुनाफे के साथ बाहर निकल सकें।

2. ‘सही हाथों’ में कमान और ‘इंडिगो’ से सबक: सरकार के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि उनके निकलने के बाद बाजार का क्या होगा। सरकार ने हाल ही में एविएशन (विमानन) सेक्टर में जो देखा है, उससे वह सतर्क है।

वहां गो फ़र्स्ट (Go First) जैसी एयरलाइनों के धराशायी होने और स्पाइसजेट के कमजोर पड़ने के बाद, बाजार में इंडिगो (IndiGo) का एकतरफा प्रभुत्व बहुत बढ़ गया है। जब बाजार में प्रतिस्पर्धा कम हो जाती है और एक ही खिलाड़ी हावी हो जाता है, तो अंततः नुकसान ग्राहकों को होता है (जैसे कि महंगी टिकटें और सेवाओं में कमी)।

सरकार टेलीकॉम सेक्टर में ऐसी ही स्थिति बिल्कुल नहीं चाहती। वे नहीं चाहते कि उनके निकलने के बाद बाजार पूरी तरह से जियो और एयरटेल के नियंत्रण में आ जाए।

इसलिए, सरकार का एग्जिट प्लान सिर्फ शेयर बेचना नहीं है। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहेगी कि उसकी ~33% हिस्सेदारी ‘सही और मजबूत हाथों’ में जाए। वे किसी ऐसे रणनीतिक निवेशक (strategic investor) को अपनी हिस्सेदारी सौंपना चाहेंगे जो आर्थिक रूप से सक्षम हो और जिसमें रिलायंस जियो और एयरटेल को लंबी टक्कर देने का दम हो।

सरकार का उद्देश्य Vi को सिर्फ जीवित रखना नहीं, बल्कि एक प्रतिस्पर्धी खिलाड़ी बनाए रखना है ताकि बाजार का संतुलन बना रहे।

निष्कर्ष

वोडाफोन आइडिया के लिए संदेश स्पष्ट है। सरकार ने उन्हें ‘ऑक्सीजन’ दी है और वे भविष्य में ‘रिलीफ पैकेज’ के जरिए और मदद कर सकते हैं। लेकिन, सरकार हमेशा के लिए वहां नहीं है।

सरकार एक जिम्मेदार अभिभावक की तरह व्यवहार कर रही है जो कंपनी को अपने पैरों पर खड़ा करके उसे एक सक्षम संरक्षक को सौंपना चाहती है, ताकि भारतीय टेलीकॉम बाजार में उपभोक्ताओं के पास हमेशा कम से कम तीन मजबूत विकल्प मौजूद रहें।

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